प्राइमरी की पाठशाला में
बरगद के पेड़ के नीचे
गुरूजी ने बताया था
गुरु जी ने सिखाया था
ये जो तुम्हारी किताब है
तुम्हारे पुरखों का हिसाब है
इनको पढो
इनकी तरह बनो
यही तुम्हारी परीक्षा है
और
यही हमारी शिक्षा है
अब थोडा बड़ा हो गया हूँ
सालों का पढ़ा हो गया हूँ
कभी खोलता हू कोई किताब
तो दिखता है पुरखों का हिसाब
सोचता हू मै भी कुछ जोड़ दू
देश के दुश्मनों का गुरुर तोड़ दू
सोचता हू मेरी भी एक किताब हो
भविष्य में मेरा भी कुछ हिसाब हो
लोग मुझे भी पाठशाला में पढ़े
लोग मुझे भी भारत का बेटा कहे
क्योकि जिन्दगी के इस दौर में
अब भी मुझे याद है
गुरूजी ने बताया था
गुरु जी ने सिखाया था
प्राइमरी की पाठशाला में
बरगद के पेड़ के नीचे
ये जो तुम्हारी किताब है
तुम्हारे पुरखों का हिसाब है
Ajay singh
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