गोंडा
यह जमीं वही है पुरखों की
जिनको "गोंडेश"बुलाते थे
अस्सी कोसों तक के राजा
आ करके शीश झुकाते थे
वो रघुकुल गोनार्ध यही
यहाँ राम भी पढने आते थे
इस माटी में रहते रहते
खरहे भी शेर हो जाते थे
यह तुलसी की धरती है
यहीं मानस पाठ रचाया था
आचार्य पतंजलि ने पहले
यही योगसूत्र सिखलाया था
पूछो बांसी के महलों से
ये राजपूतानी धरती है
परिणाम भले चाहे जो हो
जो कहती है वो करती है
गोंडा के महलों दुर्गों ने
गोरों के गोले खाए है
यहाँ भारत माता की खातिर
बेटों ने शीश कटाए हैं
जहाँ जिगर गोंडवी रहते हों
लाहिड़ी की जय जो कहते हों
जिस मिटटी में अटल हुए
बागी के कितने कतल हुए
इतिहास प्रसिद्ध ये गोंडा है
दुश्मन जिससे शर्मिंदा है
बच्चो बच्चो और बूढों के
रग़-रग में भारत जिन्दा है
Ajay singh
सत्तावन की तलवारों से
ReplyDeleteमची ग़दर जब भारी थी
गोंडा में बूढों बच्चों की
मिट जाने की तयारी थी